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आखिर हम बाजार क्यों जाते हैं ? बाजार जा कर घूमने , सर्वे करने का हमारा उद्देश्य क्या होता है ?
  • हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा हमें ऑप्शन देखने को मिले । ज्यादा से ज्यादा चीज हमें रूबरू देखकर उन्हें समझने , जानने और परखने का अवसर मिले और साथ ही साथ हम उन्हें परख करते हुए सौदेबाजी कर सके । हम अपने बटुए को देखते हुए अपने पैसे की पूरी पूरी कीमत वसूल सकें ।
  • इसीलिए हम बाजार में जाते हैं । हमारी अधिकतम सीमा 5या 10 दुकानों तक ही सीमित रहती है । उसके बाद हम अतिरिक्त दुकान को या तो देख नहीं पाते या फिर हम थक जाते हैं । अमूमन जिन दुकानों में ज्यादा भीड़ होती है वही हम सबसे ज्यादा जाना पसंद करते हैं। इस विचार से कि जरूर कुछ खास बात होगी तभी तो इतनी भीड़ है और इस प्रकार हम नए और अच्छे दुकानदारों को अवसर दे ही नहीं पाते ।
  • काश उन्हें भी कोई सेवा का मौका दे पाते इसके पूर्व दुकानदार और नए-नए ऑप्शन लगभग लगभग समाप्त हो जाते हैं । इस सौदे कार्य के लिए लोकेशन यानी दुकान का सही जगह पर होना भी बहुत बड़ा मायने रखता है। इसके कारण दुकानदार के ऊपर एक अतिरिक्त भार पड़ता है किराए का और साथ ही साथ पार्किंग आदि व्यवस्था का ।
  • जरा गंभीरता से सोचे कि कोई भी दुकानदार इतनी महंगे महंगे किराए पगड़ी और पार्किंग की व्यवस्थाओं के लिए इतने प्रकार की तम झाम , खर्चों को कहीं ना कहीं से तो वसूलने का प्रयास करता ही होगा ।

यदि हम इन सब चीजों को गंभीरता से सोच सके तो इन सब समस्याओं को सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए आसानी से हल कर सकते हैं और अपने मनपसंद सौदे किफायती से किफायती रेट में होम डिलीवरी द्वारा प्राप्त कर सकते हैं । थिंक फॉर यूनिटी आपके लिए लाया है ऐसा ही एक बेहतरीन तरीका जिसमें आप अपनी मनपसंद सर्विस एवं मनपसंद सामग्रियों का अपने डोर स्टेप पर होम डिलीवरी द्वारा आनंद उठा सकते हैं ।

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